विश्वदीपक का लेख: चौरसिया टी वी मीडिया की गंभीर बीमारी का एक छोटा सा नमूना मात्र है, बीमारी देश का विभाजन करा देगी!

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आईआईएमसी के दिनों की बात थी. कोई कार्यक्रम था. बेरोजगार तो था ही उम्र भी कम ही थी. ‘राष्ट्रवादी बेवकूफ’ दीपक चौरसिया अपने चमचों समेत आया था. ज्ञान दे रहा था कि सांप, बिच्छू, बंदर, शेर, ज्योतिष, नाग-नागिन ख़बर की शक्ल में इसलिए चलाया जाते हैं क्यूंकि दर्शक यही देखना पसंद करते हैं. टीवी पत्रकारिता का ग्रामर समझा रहा था.

कहीं यह उन्हीं नाग नागिनों का आशीर्वाद तो नहीं कि हमारे सर पर भयानक किस्म का महानाग सवार है? बहरहाल, मैंने कुछ पूछा (सवाल याद नहीं) जो उसे नागवार गुजरा. बोला : नाम क्या है तुम्हारा? मैंने कहा: तुम्हारा नाम दीपक है, मेरा विश्व दीपक. इसके बाद कुछ अंट शंट बोला और बगल झांकने लगा.

दरअसल, चौरसिया टी वी मीडिया की गंभीर बीमारी का एक छोटा सा नमूना मात्र है. बीमारी इतनी ख़तरनाक है कि अगर इसका इलाज़ नहीं किया गया तो आने वाले कुछ दशकों में यह बीमारी देश का विभाजन करवा देगी.

फिर से दोहरा रहा हूं– दीपक चौरसिया जिस महा गंभीर बीमारी का एक संकेत मात्र है अगर उसका समय रहते इलाज़ नहीं किया गया तो या तो नॉर्थ ईस्ट या साउथ अलग होने की राह पर चला जाएगा. सब मिसाईल, रफाएल धरे रह जाएंगे.

रही बात शराब पीकर एंकरिंग करने की तो वो वह यह आज से नहीं कर रहा. जब इंडिया न्यूज़ में था, तब भी करता था. आलम यह था कि ग्लास लेकर स्टूडियो में बैठता था. आईआईएमसी के ही दो लड़के बेचारे नौकरी, प्रमोशन के चक्कर में उसकी सेवा किया करते थे. जिस भी चैनल में डील करता है, अपने कुनबे को भी साथ ले जाता है. इसका कुनबा, एक राज्य संभालता है और यह दिल्ली.

चौरसिया के सारे समकालीन जो टीवी मीडिया में उसके बॉस रहे या उसके बराबर रहे सब जानते हैं. कास्टिंग काउच, बार्टर सिस्टम का ज़िक्र करना यहां विषयांतर होगा. क्या यह मुमकिन है कि इंडिया न्यूज़ का मालिक कार्तिकेय शर्मा यह सब ना जानता हो ? न्यूज़ नेशन के अतुल कुलश्रेष्ठ, संजय कुलश्रेष्ठ इसके बारे में ना जानते हो — हो ही नहीं सकता.

फिर भी यह लफंग किस्म का आदमी लाखों करोड़ों का पैकेज लेता रहा, समाज में साम्प्रदायिकता का ज़हर घोलता रहा और किसी को आज तक कोई आपत्ति नहीं हुई ? मुझे तो हैरानी चौरसिया पर कम, इस समाज और सिस्टम पर ज्यादा होती है. हम मरे हुए लोगों का एक झुंड हैं.

तस्वीर उस वक्त की है जब चौरसिया एंड तिहाड़ी चौधरी एंटी सीएए-एनआरसी प्रदर्शन को एक साथ कवर करने गए थे.

हमारा समाज अफीम खाकर सोया है. इसने तो सिर्फ शराब पी कर एंकरिंग की है. अगर ऐसा नहीं होता तो इस जैसे एंकर, एंकरानियों को सिर्फ बाहर ही नहीं फेंका जाता बल्कि उन्हें सज़ा भी होती.

चेहरे पर सफेदी पोतकर हर दिन समाज में हिंदू मुस्लिम, सांप्रदायिकता, जाति का काला रंग पोतने वाली यह जमात हिंदुस्तान के लिए बेहद खतरनाक है.

(लेखक पत्रकारिता से जुड़े हैं)

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