दीपक असीम का लेख: बाबर की कप्तानी से हारा पाकिस्तान

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दीपक असीम

अगर आप पहले खेलते हुए पौने दो सौ रन बनाते हैं और फिर आपका एक गेंदबाज चार विकेट लेकर आस्ट्रेलिया का मध्यक्रम ध्वस्त कर देता है, तो बस अच्छी कप्तानी ही बाकी बचती है, जिसकी कमी नज़र आई। जब आस्ट्रेलिया के पांच विकेट गिरे, तो पाकिस्तान ने समझ लिया था कि वो जीत रहा है और ढीला पड़ गया। वो भूल गया कि पिछला मैच न्यूज़ीलैंड ने कैसे जीता था। टी-20 क्रिकेट में टेबल पर पड़ी जीत तब तक आपकी नहीं है, जब तक आप उसे उठा कर जेब में नहीं रख लेते और बाबर यही करने से चूक गए। खिलाड़ियों ने जीत टेबल पर रख दी थी, मगर बाबर उसे उठाकर अपनी जेब में नहीं रख पाए।

हसन को दोष मत दीजिए कि उन्होंने 19 वें ओवर में मैथ्यू वेड का कैच छोड़ दिया। इतना तनाव तो पैदा ही नहीं होना चाहिए था कि हसन पर इतना दबाव आए। पाकिस्तान की टीम का तनाव और दबाव हसन के कैच छोड़ने में दिखा। यह कैच छूटने के बाद कप्तान बाबर हसन के पास गए, जबकि उन्हें शाहीन आफरीदी के पास आकर समझाना चाहिए था कि क्या करना है। मैथ्यू वेड ऑन साइड में बड़े शॉट ट्राय कर रहे थे। धोनी होते तो कहते ओवर द विकेट की बजाय राउंड द विकेट आओ और भले चार गेंद वाइड हो जाएं इसे वाइड यार्कर ही दो। जब विकेट के लिए कोशिश करनी थी, तब पाकिस्तान की टीम रन बचा रही थी और जब रन बचाने चाहिए थी शाहीन आफरीदी मैथ्यू वेड को बोल्ड या एलबीडब्ल्यू आउट करने की कोशिश कर रहे थे। आखरी तीन गेंदों पर जो तीन छक्के लगे, वो तीनों ही गेंद मेथ्यू वेड के पाले की थीं और अगर वाइड यार्कर होती तो एक भी शॉट नहीं लगना था।

बेशक बल्लेबाजी अदभुत हुई मगर पाकिस्तान गेंदबाजी और कप्तानी में चूक गया। ऐसे मौकों पर ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ी ऑफ साइड में लगा कर वाइड यार्कर ही ट्राय कराई जा सकती थी। भले ही नौ खिलाड़ी ऑफ साइड में खड़े करके ऑन साइड खाली छोड़ दिया जाए कि दम हो तो ऑफ की गेंद को ऑन साइड में खींच कर रन बना लो, मगर ऑफ साइड में तो हम तुम्हें रन नहीं बनाने देंगे। जब बल्लेबाज ऑफ की गेंद को ऑन साइड खींच कर लाता है तो कई बार मिड ऑन पर गेंद खड़ी हो जाती है। बाबर आज़म को अच्छा कप्तान कहा जाता है, मगर बेहतर होता कि शोएब मलिक कप्तानी कर रहे होते।

आस्ट्रेलिया को न्यूज़ीलैंड से सावधान रहने की ज़रूरत है क्योंकि न्यूज़ीलैंड के कप्तान इस दौर के सबसे चतुर कप्तानों में से हैं। क्रिकेट में कितना ही कौशल क्यों ना लगता हो, अंततः तो यह मैदान में खेली जाने वाली शतरंज ही है, जिसका दिमाग़ जितना ठंडा, जिसका दिमाग़ जितना तेज़, वो उतना बड़ा चैंपियन। धोनी के बाद अगर हमें आईसीसी ट्राफी नहीं मिली तो इसकी वजह यही है।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं)

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