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लोकसभा में बोले दानिश अली, ‘मेरा सर शर्म से झुक जाता है, जब इसी सदन में सत्ता पक्ष के सांसदों द्वारा तब्लीग़ी जमात….’

नई दिल्लीः बहुजन समाज पार्टी के सांसद कुंवर दानिश अली ने लोकसभा में अपने संबोधन में उन बयानों पर आपत्ती जताई है जिसमें कोरोना को एक धर्म विशेष से जोड़ा गया था। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह आपदा में अवसर, जैसा प्रधान मंत्री जी ने कहा, यह बिल्कुल सही शब्द है कि हमारे यहां जो मेडिकल इनफ्रास्टक्चर है, पूरे देश में और खास तौर से उत्तर प्रदेश और जिस क्षेत्र अमरोहा से हम आते हैं, अभी पिछले दिनों नीति आयोग का तो बाकायदा पेपर सर्कुलेट हो गया था कि जिला अस्पतालों को भी पब्लिक प्राइवेट मॉडल पर बेच दिया जाए, उनके साथ प्राइवेट लोगों के सौंप दिया जाए। आज क्या हो रहा है? प्राइवेट हॉस्पिटल्स में कम से कम आठ लाख रुपये जमा कराये जाते हैं, अगर कोई कोरोना पेशेंट दिल्ली के अंदर जाता है। मेरी आपके माध्यम से मंत्री जी से गुजारिश है कि सरकारी अस्पतालों का इनफ्रास्टक्चर क्रिएट किया जाए, उसे बढ़ाया जाए।

अमरोहा से लोकसभा सांसद दानिश अली ने कहा कि मैं सिर्फ इतना ही कहंगा, अभी सत्ता पक्ष के एक सांसद निशीकांत जी ने बहुत अच्छा भाषण किया। अनेकता में एकता को बढ़ाने का यह मौका मिला है। यह सही बात है। यह मौका मिला है। मेरी आपके माध्यम से अध्यक्ष जी से गुजारिश है, बड़ा अफसोस हुआ, जब एक जगह से, एक पाइंट से एक कम्युनिटी को टार्गेट करके सरकार आंकड़े बताती थी और पूरे देश को भ्रमित करने का काम किया कि यह कोरोना जो है, इसे तबलीगी जमात के लोगों ने फैलाया है।

मेरा सर शर्म से झुक जाता है

बसपा सांसद ने कहा कि मेरा सिर शर्म से झुक जाता है, जब इसी सदन के अंदर आज भी सत्ता पक्ष के सांसदों ने कहा कि अस्सी प्रतिशत कोरोना इस देश में तब्लीगी जमात के लोगों ने फैलाया है। मैं इस बात को कहना चाहता हूं कि आप लोगों को माफी मांगनी चाहिए। चाहे तब्लीगी जमात के लोग हों, तिरूपति मंदिर के प्रिस्ट को कोरोना हुआ हो, अयोध्या के मंदिर के प्रिस्ट को कोरोना हुआ हो, चाहे किसी मस्जिद या गिरिजाघर के प्रिस्ट को कोरोना हुआ हो, बीमारी मजहब देखकर नहीं आती है।

दानिश अली ने कहा कि हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी पंचायत में आज मेरा सिर शर्म से झुक रहा है। हमने पूरी दुनिया के सामने अपना मजाक उड़वा दिया। हमने सब्जी को भी मजहब को रंगों में बांट दिया, हमने बीमारी को भी मजहब के रंगों में बांट दिया। यह देश अनेकता में एकता का देश है। यह देश मिलीजुली संस्कृति का देश है। इसे माननीय फाइनेंस मिनिस्टर ने एक्ट ऑफ गॉड कहा, इससे हमें इससे सीख लेनी चाहिए कि आने वाले समय में देश को बांटने की कोशिश नहीं की जाएगी। ऐसी संकट की घड़ी में पूरा राष्ट्र जात और मजहब से उपर उठकर इकट्ठा होंगे और इस बीमारी से लड़ने का काम करेंगे।

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