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धर्मांतरण: कई धर्मों की किताबों का किया अध्ययन और रोज़ मंदिर जाने वाली रिचा ने अपना लिया इस्लाम

कानपुरः धर्मांतरण के बाद रिचा सचान से माही अली बनी घाटमपुर के बिहूपुर गांव की युवती के परिजनों ने रिचा के धर्मांतरण पर हैरानी जताई है। एक अख़बार से बात करते हुए रिचा के परिजनों ने कहा कि उन्हें अभी तक विश्वास नहीं हो पा रहा है कि जो बेटी रोज मंदिर जाती थी, वह आखिर मस्जिद कब और कैसे पहुंच गई। जानकारी के लिये बता दें कि 20 जून को यूपीएटीएस ने दिल्ली में रहने वाले डॉ. उमर गौतम और मुफ्ती जहांगीर को धर्म परिवर्तन कराने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इन दोनों धर्म प्रचारकों पर आरोप है कि उन्होंने मूक बधिर छात्रों का लालच देकर धर्म परिवर्तन कराया है।

MBA करने वाली ने पढ़े कई धर्म

हिंदू धर्म त्याग कर माहील अली बनने वाली रिचा ने बताया कि उसने 2015 में इलाहाबाद के झूसी स्थित एक कॉलेज से एमबीए किया था। इसके बाद वह नौकरी के लिए जयपुर चली गई, रिचा के मुताबिक़ कि अनेक भगवान हैं या एक भगवान है, इस जद्दोजहद में उसने कई धर्मों को पढऩा शुरू किया। कुरान का अंग्रेजी वर्जन खरीदा और बुखारी शरीफ और हदीस की किताबें पढऩा शुरू कर दीं, इसके बाद इस्लाम का अनुसरण शुरू कर दिया। रिचा बताती है कि डेढ़ साल बाद 2017 में उसने कलमा पढ़ा और फिर तय किया कि इस्लाम धर्म कुबूल करेगी। 2018 में वह दिल्ली के एक NGO में काम करने लगी। वहीं उसने जानकारी जुटाई, जिसमें पता चला कि दो सर्टिफिकेट चाहिए होंगे, जिसमें एक मुफ्ती और दूसरा SDM द्वारा मिलेगा। इसके बाद उसने एसडीएम ऑफिस से धर्मांतरण का सर्टिफिकेट हासिल किया। फिर दिल्ली के ओखला में इस्लामिक दवाह सेंटर चलाने वाले मुफ्ती जहांगीर आलम से मिली।

उमर गौतम चलाते हैं दावाह सेंटर

रिचा उर्फ माही अली बताती हैं कि उमर गौतम दिल्ली स्थित दावाह सेंटर को चलाते हैं। वहां एसडीएम का सर्टिफिकेट दिखाने के बाद उन्हें मुफ्ती का प्रमाण पत्र भी मिला। रिचा का कहना है, उस सर्टिफिकेट की एक कॉपी इस्लामी दवाह सेंटर में ही जमा करा ली गई थी। इसकी वजह से ही उमर गौतम की लिस्ट में उसका नाम आया है। रिचा ने प्रयागराज के अपने प्रोफेसर का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने कभी धर्मांतरण के लिए प्रेरित नहीं किया, रिचा ने कहा कि वह धर्मांतरण प्रकरण में शामिल अन्य लोगों को नही जानती और ना ही धर्मांतरण के लिए दूसरों को प्रेरित करती हैं। वह मुस्लिम बस्ती में भी नहीं रहती।

बचपन से धार्मिक थी रिचा

रिचा के पिता शशि कुमार ने बताते हैं कि वह बचपन से बहुत धार्मिक थी। उमरी स्थित इंटर कॉलेज जाते समय रास्ते में पडऩे वाले मंदिर में रोजाना जाती थी। उन्होंने बताया, पिछले साल दिसंबर में रिचा तीन दिनों के लिए घर आई थी, लेकिन इस दौरान भी ऐसा नहीं लगा था कि उसने धर्म परिवर्तन कर लिया है। सितंबर में चचेरे भाई की मौत होने पर भी वह घर आई थी और हफ्ते भर रुकी थी। कोरोना काल में ऑक्सीमीटर और दवाइयां भी भिजवाई थीं। 19 जून को एलआइयू के कुछ लोग घर आए, उसके बाद जानकारी हुई। इसके बाद उन्होंने फोन पर पूछा तो रिचा ने इतना बताया कि उसने इस्लाम धर्म कुबूल कर लिया है। रिचा के चाचा राजकुमार का कहना है कि उन्हें भी इस बात की कोई जानकारी नहीं थी।