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धर्मांतरण मामलाः SIO की मांग ‘उमर गौतम और मुफ्ती जहांगीर का को रिहा किया जाए’

नई दिल्लीः स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया ने धर्मांतरण कराने के आरोप में गिरफ्तार किये गये मौलाना उमर गौतम और मुफ्ती जहांगीर को रिहा करने की मांग की है। एसआईओ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मुहम्मद उमर गौतम एक प्रख्यात व्यक्तित्व है। उन्होंने खुद अपने सद्बुद्धि एवं स्वतंत्र इच्छा के अनुसार इस्लाम धर्म को कबूल किया है। यह आरोप कि वह लोगों को जबरदस्ती या लालच के द्वारा इस्लाम धर्म अपनाने को प्रयासरत है बिल्कुल गलत है।

एसआईओ उमर गौतम और मुफ्ती जहांगीर कासमी की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करता है और उनकी तत्काल रिहाई का आह्वान करता है और इस तरह के प्रयासों और उत्पीड़न को चिंता के साथ देखता है। हमारा मानना है कि इस मामले का इस्तेमाल सरकार और मीडिया के एक समूह द्वारा संप्रदायिक घृणा और राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।

एसआईओ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए धर्मांतरण कानून का भी विरोध करती है। यह कानून संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकार जैसे धर्म की स्वतंत्रता और उसका प्रसार जैसे को प्रतिबंधित करता है। हमें उम्मीद और विश्वास है कि संवैधानिक मूल्यों की सर्वोच्चता सुनिश्चित करते हुए उच्च न्यायालय पोलिस और सरकार हरकतों पर लगाम लगाएगा।

JEE, NEET व अन्य एंट्रेंस परीक्षाओं के आयोजन के निश्चित टाइम टेबल तुरंत जारी किए जाएं

भारत के कई हिस्सों में कोविड की दूसरी लहर के क्षीण हो रही है। ऐसे में स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया (एसआईओ) ने JEE, NEET, CUCET और इसी तरह की अन्य एंट्रेंस परीक्षाओं हेतु एक निश्चित समय सारणी जारी करने की मांग की है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ को लिखे गए एक पत्र में एसआईओ ने यह सुझाव भी दिया है कि परीक्षार्थियों को इन प्रतियोगी परीक्षाओं में कई प्रयासों की अनुमति दी जानी चाहिए। संगठन का कहना है कि परीक्षा केंद्रों की संख्या में भी वृद्धि की जानी चाहिए और परीक्षाओं को कई पालियों में आयोजित किया जाना चाहिए। संगठन का मानना है कि ये उपाय छात्रों के बीच तनाव और चिंता को कम करेंगे और यह भी सुनिश्चित किया जा सकेगा कि वे अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का समझौता किए बिना परीक्षाएं दे सकें।

एसआईओ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद सलमान अहमद ने कहा‌ कि, “कोविड-19 महामारी के दौरान, विभिन्न स्तरों पर परीक्षा आयोजित करने का मुद्दा अत्यंत ज्वलंत बन चुका है जिसे जल्द से जल्द हल किया जाना चाहिए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उचित उपाय किए जाने चाहिए और यह सुनिश्चित करने के लिए विचार किया जाना चाहिए कि शिक्षा और मूल्यांकन के महत्वपूर्ण कार्य को विद्यार्थियों की एक पूरी पीढ़ी के मानसिक और शारीरिक कल्याण हेतु किसी भी प्रकार का जोखिम पैदा किए बिना पूरा किया जा सके।”

संगठन ने प्रस्ताव रखा है कि अगले 3-4 महीनों में सभी परीक्षाओं को आयोजित करने की एक निश्चित समय-सारिणी जारी की जानी चाहिए ताकि विद्यार्थी अपनी परीक्षाओं के बारे में लगातार बनी हुई चिंता की स्थिति से बाहर आ सकें। तनाव को कम करने और इन परीक्षाओं की ‘make-or-break ‘ प्रकृति को कम करने के लिए विद्यार्थियों को आने वाले अकादमिक वर्ष के लिए एक से अधिक प्रयासों की अनुमति दी जानी चाहिए और उनके सभी प्रयासों में से सर्वोत्तम प्रयास को दाख़िले के लिए पात्रता के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।

पत्र कहता है कि सभी परीक्षा केंद्रों में कोविड-19 प्रोटोकॉल के सख़्त अनुपालन को सुनिश्चित करने के अलावा पूरे देश में परीक्षा केंद्रों की संख्या में वृद्धि करना भी ज़रूरी है। बड़ी संख्या में छात्रों द्वारा दी जाने वाली परीक्षाओं को JEE की तर्ज़ पर विभिन्न पालियों में लिया जाना चाहिए, ताकि प्रत्येक केंद्र में परीक्षार्थियों की संख्या को सीमित किया जा सके। साथ ही साथ परीक्षार्थियों और परीक्षा केंद्रों के बीच की दूरी को भी कम किये जाने पर भी विचार किया जाना‌ चाहिए।

सलमान अहमद ने कहा कि, “वर्तमान संकट ने एक बार फिर दर्शाया है कि हमारी पूरी शैक्षणिक प्रणाली कितनी हाई-स्टेक्स वार्षिक परीक्षाओं पर पूरी तरह निर्भर है। कई अध्ययनों से पता चलता है कि इस तरह की प्रणाली आधारभूत और स्थिर शिक्षा को बढ़ावा देने के बजाय रटने और परीक्षाओं में प्रदर्शन पर ही सारा ज़ोर देती है। इस संबंध में हम शिक्षा मंत्रालय से छात्रों, अध्यापकों, अभिभावकों, नीति निर्माताओं व अन्य हितधारकों के साथ राष्ट्रीय स्तर पर बातचीत शुरू करने का अनुरोध करते हैं।”