लखबीर के परजिनों से मिले चंद्रशेखर, कहा ‘पूरी ताकत से लड़ेंगे इंसाफ दिलाने की लड़ाई’

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नई दिल्लीः आज़ाद समाज पार्टी के प्रमुख और भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद ने आज लखबीर सिंह के परिजनों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी। इस दौरान उन्होंने लखबीर के परिजनों को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। ग़ौरतलब है कि लखबीर सिंह की निहंगों द्वारा बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। निहंगों का आरोप था कि लखबीर ने गुरु ग्रंथ साहिब का अपमान किया है। इस हत्या से इलाक़े में सनसनी फैल गई थी।

हरियाणा के कुंडली बॉर्डर पर बर्बर तरीके से मौत के घाट उतारा गया लखबीर सिंह उर्फ टीटू तरनतारन के गांव चीमा खुर्द का रहने वाला था। भारत पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांव कलस में पैदा हुए लखबीर को उसकी बुआ ने बचपन में ही गोद ले लिया था। उसकी मौत के बाद दोनों गांवो में कोहराम मचा हुआ है। गांव के लोगों के अनुसार बचपन में ही लखबीर और उसकी छोटी बहन राजबीर कौर को उसकी बुआ महिंदर कौर और फूफा हरनाम सिंह ने गोद ले लिया था। गरीबी से जूझने वाले लखबीर का वर्ष 2006 में अमृतसर के गांव लोधेवाल की जसप्रीत कौर के साथ विवाह हुआ था।

क्या बोले चंद्रशेखर

आज़ाद समाज पार्टी के प्रमुखख चंद्रशेखर आज़ाद ने बीते रोज़ ट्वीट कर जानकारी दी थी, कि वे 18 अक्टूबर को लखबीर सिंह के परिवार से मिलेंगे। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा था कि “सिंघु बॉर्डर पर दलित मज़दूर लखबीर सिंह की बर्बर हत्या रूह कंपा देने वाली है। हम कल 18 अक्टूबर, दिन सोमवार को पीड़ित परिवार से मिलने उनके घर जाएंगे और परिवार के साथ दुख साझा करेंगे। उन्हें न्याय दिलाने की लड़ाई पूरी ताकत से लड़ी जाएगी।”

बक़ौल चंद्रशेखर लखबीर के पिता ने बताया है कि उनका बेटा 50 रुपये प्रतिदिन का मजदूर था, वह इतनी दूर कैसे जा सकता है, उनके बेटे को षड़यंत्र करके फंसाकर मारा गया है।

रिमांड पर हैं आरोपी

इस दौरान पुलिस ने सिविल जज जूनियर डिविजन किमी सिंगला की कोर्ट में पेश करते हुए 14 दिन की रिमांड मांगी, लेकिन कोर्ट ने सिर्फ 6 दिन की रिमांड मंजूर की है। इसके साथ ही जज ने कहा है कि तीनों आरोपियों की हर रोज मेडिकल चेकअप करने के साथ डीडी एंट्री होगी।

तीनों आरोपियों ने कबूला- हमने की लखबीर की हत्‍या

कोर्ट में पेशी के दौरान तीनों आरोपियों ने जज के सामने कबूला कि उन्होंने ही लखबीर सिंह की हत्या की है। इस दौरान ओरापी निहंग नारायण सिंह ने कहा कि मैंने पैर काटा था, तो भगवंत सिंह और गोविंद सिंह ने उसे लटकाया था।

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