चर्चा में विदेश

म्यांमार का सबक़ः बहुसंख्यकवाद न सिर्फ मानवाधिकारों बल्कि लोकतंत्र को भी समाप्त कर देता है

म्यांमार मे लोकतांत्रिक तरीक़े से चुनी गई सरकार का सेना ने तख्तापलट कर दिया, और म्यांमार की नेता आंग सांग सू की को कैद कर लिया गया। अब म्यांमार की जनता सेना के ख़िलाफ सड़को पर उतर आई है। Voice Of America के हवाले से प्राप्त यह तस्वीर म्यांमार के शहर मांडले की है। जहां […]

चर्चा में देश

आंसुओं और आर्थिक ‘तंगी’ से जूझने वाले ‘संतोष’ की इन हरकतों को जानकर आपको नहीं मिलेगा ‘आनंद’

दीपक असीम मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पच्चीस साल होने आए। मगर मोबाइल फोन का स्विच ऑफ करके जैसा सुकून उस दिन मिला था, वैसा फिर कभी महसूस नहीं हुआ। उस दिन यानी जब मैंने संतोष आनंद को विदा किया था और उनके प्रति अपने आपको जिम्मेदारियों से मुक्त महसूस किया था। उन्हें मुशायरे में […]

चर्चा में देश

रवीश की विश्वसनीता पर अदालत की मुहर, रवीश की रिपोर्ट के आधार पर तीन लोगों को मिली ज़मानत

दीपक असीम एनडीटीवी के रवीश कुमार और उनके लाखों करोड़ों चाहने वालों के लिए आज का दिन गर्व का दिन है। आज उन्हें मैगसेसे पुरस्कार से भी बड़ा पुरस्कार मिला है और वो है विश्वसनीयता का तमगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने आज एनडीटीवी के एक वीडियो के आधार पर दिल्ली दंगों के आरोप में एक साल […]

चर्चा में देश

रश्मि और सामंत और दिशा रविः पढ़े लिखे वर्ग की सांप्रदायिक कुंठा का इलाज कैसे होगा?

हमारे सामने दो ख़बरें हैं, पहली ख़बर इंग्लैंड से है, और दूसरी ख़बर भारत से ही है। लेकिन दोनों ख़बरों का संबंध भारत से ही है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट यूनियन की पहली भारतीय महिला प्रेसिडेंट चुनी गईं रश्मि सामंत ने पद से इस्तीफा दे दिया है। दरअस्ल रश्मि की पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट्स के […]

चर्चा में देश

राम पुनियानी का लेखः हामिद अंसारी और भारतीय बहुवाद को खतरे

भारत का उदय विविधता का सम्मान करने वाले बहुवादी प्रजातंत्र के रूप में हुआ था। अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए हमारे संविधान में समुचित प्रावधान किये गए, जिनका खाका सरदार पटेल की अध्यक्षता वाली संविधानसभा की अल्पसंख्यकों पर समिति ने बनाया था। आज, सात दशक बाद, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और उनके आर्थिक कल्याण के सन्दर्भ […]

खेल चर्चा में देश

ऐतिहासिक है वसीम जाफर का क्रिकेट करियर, फिर भी जाफर के समर्थन में नहीं उतर रहे ‘बड़े’ क्रिकेटर?

मुकुल केशवन ‘भारतीय क्रिकेट इस हफ्ते लगभग मर ही चुका है। वो हिमालय की तलहटी में आए भूस्खलन में दबा हुआ है। वह अब भी वहीं पड़ा है, गंभीर हालत में क्योंकि सैकड़ों भारतीय खिलाड़ी जो उस पर पड़ी मिट्टी को हटा कर उसे बचा सकते थे उन्होंने तय किया है कि उन्हें दूसरी तरफ […]

चर्चा में देश

पद देखकर आपराधिकता तय नहीं हो पर जांच भी क्यों टले?

पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर लगे आरोप पर जो कार्रवाई हो रही है (और अन्य बातों से भी) यह मामला सुलझने की बजाय उलझता जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश के अलावा यह मामला कार्यस्थल पर यौनशोषण का है और अगर सुप्रीम कोर्ट में यौनशोषण की शिकायत (और मुख्य न्यायाधीश पर आरोप) का निस्तारण सही […]

खेल चर्चा में देश

प्रियदर्शन का सवालः क्या वसीम जाफर के पक्ष में कोई नहीं बोलेगा?

वसीम जाफ़र के साथ खड़े हों बांग्ला के जाने-माने खेल पत्रकार और लेखक मति नंदी का एक उपन्यास है- ‘स्ट्राइकर’. यह उपन्यास एक फुटबॉलर के संघर्ष की कहानी है जो अपने आर्थिक अभावों और संकटों से जूझता हुआ, तमाम तरह के विपरीत हालात का मुक़ाबला करता हुआ, आख़िरकार शिखर पर पहुंचता है. उपन्यास में फुटबॉल […]

चर्चा में देश

जॉन केनेडी ने क्यों कहा था ‘कम वेतन पाने वाला पत्रकार, अधिक खतरनाक होता है’!

पत्रकारों को कम वेतन नही देना चाहिए. कम वेतन पाने वाला पत्रकार अधिक खतरनाक हो सकता है. कभी यह रोचक निष्कर्ष निकाला था, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी ने. कार्ल मार्क्स पर उनकी यह एक रोचक टिप्पणी है. यह कथन जॉन एफ केनेडी के ओवरसीज प्रेस क्लब न्यूयॉर्क में आयोजित एक पुरस्कार समारोह में, […]

चर्चा में देश

वेदप्रताप वैदिक का लेखः भारतीय मुसलमान तो दुनिया का सर्वश्रेष्ठ मुसलमान है।

कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद की संसद से बिदाई अपने आप में एक अपूर्व घटना बन गई। पिछले साठ—सत्तर साल में किसी अन्य सांसद की ऐसी भावुक विदाई हुई हो, ऐसा मुझे याद नहीं पड़ता। इस विदाई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व के एक अज्ञात आयाम को उजागर किया। गुजराती पर्यटकों के शहीद […]