चर्चा में देश

कृषि विधेयक काला कानून, अन्नदाता के वजूद को खतरा, राज्य के अधिकारों का भी होगा हनन

शरीफ मोहम्मद खिलजी विगत गुरुवार 17 सितम्बर 2020 को जब कृषि विधेयक के रूप में काला कानून जिसे पहले ही अध्यादेश के रूप में लागू किया जा चुका है और विधेयक पारित कर क़ानून बनाने की पूरी तैयारी की जा रही है, इस काले कानून से देश के अन्नदाता के वजूद को कॉर्पोरेट घरानों को […]

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बहुत कुछ बयां करता है शाहीनबाग़ की ‘दादी’ आज के ‘TIME’ में दुनिया की 100 प्रभावशाशाली शख्सियतों में शुमार होना

कृष्णकांत शाहीन बाग की दादी ने टाइम मैगजीन में जगह बनाई है। वे दुनिया के सौ प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल हुई हैं। जनता के ताकत की यही सुंदरता है कि वह हारकर भी जीत जाती है। दादी जिस कानून के खिलाफ धरने पर बैठी थीं, वह अभी बना हुआ है, लेकिन दुनिया यह […]

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सरकार ने यूनिवर्सिटियां पहले ही खाली करा ली थीं और अब सदन भी खाली करा लिया! क्या है लोकतंत्र का भविष्य?

श्याम मीरा सिंह प्रधानमंत्री उपसभापति की चाय देने वाली तस्वीरों को लोकतंत्र की सुंदर तस्वीर बता रहे हैं, लेकिन मैं आपको दूसरी तस्वीर दिखाता हूँ, ये भारतीय लोकतंत्र की सबसे दुर्भाग्यपूर्ण और डराने वाली तस्वीर है। पूरी राज्यसभा खाली है, जो कुछ राज्यसभा सांसद आपको नजर आ रहे हैं वे भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियों […]

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हमेंत कुमार का लेखः कम्पनी राज वापस लौट रहा है। आइए, अपनी नई गुलामी का स्वागत करें।

भारत में पीने के पानी का बाजार विकसित करने के लिये और उससे अकूत मुनाफा कमाने के लिये बड़ी कंपनियों ने कितनी साजिशें की हैं, सिस्टम के साथ मिल कर मनुष्य के नैसर्गिक अधिकारों को कितना कुचला है, सिर्फ यही विवरण अगर जान लिया जाए तो कारपोरेट राज के बृहत्तर उद्देश्यों को जानना, समझना आसान […]

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आखिर मोदी सरकार को इन अध्यादेशों को पास करा लेने की ऐसी जल्दी क्या पड़ी थी?

गिरीश मालवीय 20 सितंबर को राज्यसभा में लोकतंत्र में तानशाही कैसे चलाई जाती है इसका स्पष्ट उदाहरण देखने को मिला। किसान बिल के संदर्भ विपक्षी दल चाहते थे कि राज्यसभा में मतविभाजन के जरिए यह साफ हो कि कौन इस बिल के पक्ष में है और कौन विरोध में, चूंकि मोदी सरकार की राज्यसभा में  […]

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जब आप सुशांत और हिन्दू मुसलमान में व्यस्त थे तब रवीश नामी पत्रकार ने इन अध्यादेशों पर एक प्राइम टाइम किया था

किसान भाइयों आज आपकी आज़ादी का दिन है। सरकार ने इसकी घोषणा की है। 2017 में जीएसटी आई थी तो ऐसी ही एक आज़ादी का एलान हुआ था। 2016 मे जब नोटबंदी आई थी तब भी एक आज़ादी की घोषणा की गई थी। मुझे नहीं पता कि नोटबंदी और जीएसटी से मिली आज़ादी से आप […]

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नए कृषि कानून अगले 20-30 सालों में किसानों की एक बड़ी आबादी को बंधुआ मजदूर बना देगा.

विश्वदीपक दिल्ली के तख्त पर पिछले 70 सालों में इतना बड़ा मूर्ख कभी नहीं बैठा। ऐसा लगता है कि पूरी की पूरी मंडली धूर्त और दोयम दर्जे के दलालों से भरी पड़ी है।  पहले नोटबंदी से गरीबों को तबाह कर दिया। फिर ऐसा जीएसटी लाया जिसकी उलझनें आज तक नहीं सुलझ पा रही हैं। राज्यों […]

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कश्मीर के वे तीन बेबस मां जिनके ‘लाल’ को अफ्सपा ने मिटा दिया

श्याम मीरा सिंह नीचे दो तस्वीरें हैं, पहली तीन बच्चों की जिनके नाम हैं। इम्तियाज अहमद, अबरार अहमद और मोहम्मद इबरार, दूसरी तस्वीर में इन तीनों बच्चों की मां हैं। मां के नाम क्या बताना, ऐसी ही माँ हैं जैसी मेरी अपनी है, जैसी आपकी माँ होंगी। 18 जुलाई, 2020 के दिन कश्मीर के अम्सीपोरा […]

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नागरिकता संसोधन अधिनियम इस देश में लोकतंत्र की खुली परीक्षा थी, जिसमें ये देश फेल हुआ

श्याम मीरा सिंह आश्चर्य की बात है, एक लोकतांत्रिक देश के संविधान में स्पष्ट अक्षरों में अंकित है कि इस मुल्क के नागरिकों को अधिकार है कि वे जिस चीज से असहमत हों प्रदर्शन कर सकते हैं, विरोध जता सकते हैं, उसके खिलाफ नारे लगा सकते हैं, पोस्टर बना सकते हैं। बावजूद इसके इस सरकार […]

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राम पुनियानी का लेखः आस्था राजनीति का आधार बन गई और अदालत के फैसले का भी।

दिनदहाड़े बाबरी मस्जिद ध्वस्त किए जाते समय एक नारा बार-बार लगाया जा रहा था “यह तो केवल झांकी है, काषी मथुरा बाकी है”। सर्वोच्च न्यायालय ने बाबरी मस्जिद की भूमि उन्हीं लोगों को सौंपते हुए जिन्होंने उसे ध्वस्त किया था, यह कहा था कि वह एक गंभीर अपराध था। बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के बाद […]