बुशरा बानो: दो बार पास की UPSC की परीक्षा, एक बार UPPCS परीक्षा में रहीं टॉपर्स और अब बनीं IPS, पढ़ें ये रोचक स्टोरी

आस मोहम्मद क़ैफ़

भारत की सबसे प्रेरणादायक बेटियों में से एक बुशरा अरशद बानो ने एक और कमाल कर दिया है। सोमवार को सिविल सर्विस के सीट आवंटन के बाद अब बुशरा अरशद का आईपीएस बनना तय हो गया है। दो बच्चों की मां बुशरा 13 साल बाद अपनी पढ़ाई पुनः प्रारंभ कर जीवन मे 4 बड़े शारीरिक सर्जरी झेलकर भी तीन बार सिविल सर्विस एग्जाम क्रेक कर चुकी है। बातचीत में बुशरा अरशद ने अब आईपीएस आवंटित होने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा है कि इस बार वो आईपीएस ही जॉइन करेंगी। यही उनका मक़सद था।

पहले भी क्रेक किया यूपीएससी

बुशरा अरशद इससे पहले आईआरएस चुनी जा चुकी है। वो यूपीपीसीएस में टॉप रैंकर भी रही है। तब उनकी छठी रैंक थी। बुशरा अरशद इस समय फिरोजाबाद में एसडीएम सदर के तौर पर तैनात है। 2018 में उनकी 277 वी रैंक थी। 2020 में 234 पाकर आईपीएस बन गई है।

एक बार फिर कन्नौज की इस लड़की बुशरा अरशद की दिल खोलकर तारीफ हो रही है। सौरिख गाँव की यह लड़की यूपीपीसीएस -2017 में एसडीएम बनने वाली एकलौती मुस्लिम प्रतिभागी थी। यह वही बुशरा अरशद है जिनकी पिछले साल जुलाई माह में आए यूपीएससी के परिणाम में भी 277 वी रैंक आई थी। तब वो आईआरएस के लिए चयनित हुई थी,जिससे उन्हें तसल्ली नही हुई थी। इस बार फिर उन्होंने सिविल सेवा पार कर ली। अब उनकी रैंक 234 वी आई थी। हाल ही में हुई सीट आवंटन में उन्हें आईपीएस मिला है।

जुनून की हद तक जिद्दी बुशरा

बुशरा को तब तसल्ली नही थी क्योंकि जुनून की हद तक जिद्दी बुशरा का कहना था कि जब तक टॉप में नही आएगी तब तक लड़ाई जारी रहेगी। दरअसल बुशरा को ‘मिथक’ तोड़ने का शौक है और वो तमाम किवंदतियाँ ग़लत साबित कर चुकी है। जैसे उनके परिवार ,रिश्तेदार और शौहर सब मानते थे कि यह लड़की मानेगी ही नही।

एक शादी समारोह में अपनी बहन के साथ बुशरा

बुशरा कन्नौज के सौरिख गाँव की लड़की है। जिसने बिना कोचिंग के शादी शुदा होने के बाद भी नौकरी करते हुए चार सर्जरी के दर्द को सहकर देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में अपने झंडे गाड़ दिये है तो उसके लिए कुछ भी नामुमकिन नही है। बुशरा खुश है और कहती है “हो सकता है इन सब चीजों के लिए अलग अलग मिसाल हो मगर यह सभी मुझमें समायोजित हो गई तो जिद और बढ़ गई “।

पिता किसान मां गृहणी

बुशरा के पिता किसान हैं और माँ घरेलू औरत हैं। एक भाई और बहन भी अच्छे पढ़ लिख गए है। माँ- बाप दोनों ग्रेजुएट हैं। मगर बुशरा निश्चित तौर पर उनकी माँ शमा के अल्फाज़ो में ” एक्स्ट्रा ऑर्डनरी” लड़की है। बुशरा ने साढ़े सत्रह साल की उम्र में स्नातक किया था। 20 साल की उम्र होने से पहले उसने एमबीए की डिग्री हासिल कर ली थी। बारहवीं तक की पढ़ाई कन्नौज से ही पूरी की और स्नातक करने कानपुर चली गई।

अख़बार की यह कतरन बुशरा की कार्यशैली बताने के लिये काफी है।

बुशरा बताती है कि यूपीएससी का एग्ज़ाम तो तभी देना चाहती थी मगर उम्र कम पड़ गई। बुशरा की अम्मी की अगर मान लें तो बुशरा को साढ़े चार साल की उम्र में सीधे दूसरी क्लास में दाखिला दिया गया। वो कहती है “घर मे इतना सीख गई थी कि कभी दूसरे स्थान पर नही आई। वो कहती हैं बुशरा को अव्वल रहने की आदत है। वो हमेशा टॉप करती रही है।

बुशरा कहती है कि मेरे घर जो भी आता था वो अम्मी अब्बू से कहता था कि इस लड़की को कलक्टर बना दो। अब लड़की कलक्टर तो नही बनी मगर पुलिस कप्तान बन गई है। बुशरा कहती है कि यह बात मेरे दिमाग में घुस गई थी। उम्र कम होने की वजह से यूपीएससी का इम्तहान नही दे पाई तो जेआरएफ का इम्तिहान दिया था।

अपने पति और बच्चों के साथ बुशरा

पहले ही प्रयास में मिला था जेआरएफ

बुशरा ने पहले ही प्रयास में जेआरएफ की परीक्षा भी पास कर ली थी और अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी से डिस्ट्रेस मैनेजमेंट में पीएचडी कर अपने नाम से पहले डॉक्टर लिखवा लिया। यहीं उन्होंने अम्मार हुसैन से शादी कर ली। इंजीनियर असमर हुसैन और बुशरा दोनों इसके बाद सऊदी अरब चले गए। असमर वहाँ यूनिवर्सिटी में पढ़ाने लगे और बुशरा एक कम्पनी में बड़ी अफसर बन गई। अच्छी नौकरी, शानदार पैकेज को छोड़कर बुशरा भारत लौट आई और शौहर मोहतरम को भी ले आई।

और हो गई वतन वापसी

बुशरा कहती है “वतन वापसी की सिर्फ़ एक वजह थी ‘राष्ट्रप्रेम’ वतन से बेपनाह मोहब्बत, मैं अक्सर यह सोचती थी कि जो इल्म मैंने हिंदुस्तान में अपने मुल्क के बाशिंदोँ से सीखा है, उससे पैदा हुई स्किल का लाभ भी अपने ही मुल्क के बाशिंदोँ को मिलना चाहिए, यह उनका हक़ है।“

अपनी शादी के दौरान बुशरा और उनके पति असमार हुसैन (तमात तस्वीरें बुशरा के फेसबुक अकाउंट से ली गईं हैं)

उनके पति असमर हुसैन बताते हैं इसके बाद इन्होंने कोल इंडिया में जॉब कर ली, उनके दो बच्चे हो गये। उनकी पत्नी की चार मेजर सर्जरी हुई। दस साल का अरसा हो गया मगर अंदर से कलक्टर बनने की खवाइश जोर मारती रही। बुशरा आगे बताती हैं, मैंने ईमानदारी से नौकरी की। बतौर माँ अपना फर्ज निभाया।एक शौहर का ख्याल रखने वाली बीवी भी बनी। लगातार हो रही सर्जरी से होने वाले दर्द को बहाना नही बनाया और अब पुलिस कप्तान बन गई।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहे असमर हुसैन अलीगढ़ के ही रहने वाले हैं। वो कहते हैं आदतन यह गाड़ी में भी आगे ही बैठती है। जो ठान लेती है वो हर क़ीमत पर कर गुजरती है।

सभार- टू सर्किल नेट

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