हबीबगंज स्टेशन का नाम बदलने पर बोले पूर्व राज्यपाल, मुसलमानों ने इतिहास के पन्नों पर जो तारीख लिखी है वह कभी मिटाई नहीं जा सकती!

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नई दिल्ली: उत्तराखंड के पूर्व राज्यपाल डाॅ. अज़ीज़ कुरैशी ने भोपाल स्थित हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदले जाने पर भाजपा पर हमला बोला है। डाॅ . कुरैशी ने कहा कि मैं हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम रानी कमलापति स्टेशन रखने का स्वागत करता हूं! यद्यपि यह हिंदुत्व के मानने वाले और भाजपा और आर.एस.एस के सांप्रदायिक तत्वों की एक विचारधारा है.

पूर्व राज्यपाल ने कहा कि यह एक दिमाग की सोच है कि मुसलमानों के शहरों, यादगारो और दूसरी प्राचीन संस्थाओं के नाम बदलकर उनके किए गए कामों को यादगारो और निशानीयों को मिटा दिया जाए लेकिन क्या नाम बदलने से मुसलमानों के द्वारा किए गए शानदार इमारतों,सड़कों ,पुलों और दूसरी शानदार निर्माण किए गए निशानियो को मिटाया जा सकता है? क्या उनकी उनकी सभ्यता ,कल्चर, तहजीब और शानदार कारनामों को भारत के इतिहास के पन्नों से अलग किया जा सकता है! इतिहास के पन्नों पर मुसलमानों ने अपनी जो छाप छोड़ी है और अपने दिल के खून से भारत के इतिहास के पन्नों पर जो तारीख लिखी है वह कभी मिटाई नहीं जा सकती!

उन्होंने कहा कि एक आम चर्चा है और लोगों में कहा जा रहा है कि रानी कमलापति के पति देव निजाम शाह मुसलमान थे! वह अपना धर्म परिवर्तन करके मुसलमान हो गए थे लेकिन रानी कमलापति हिंदू ही रही थी! डाॅक्टर अज़ीज़ कुरैशी ने तंज करते हुए कहा कि भाजपा और उनकी सरकारों को इस बात की छानबीन कराना चाहिए और अगर यह बात सच है तो निजाम शाह पर लव जिहाद का मुकदमा मरने उपरांत चलाना चाहिए और उन्हें दोषी मानकर कड़ी से कड़ी सजा देनी चाहिए ताकि दूसरे लोगों को सबक मिल सके!