चर्चा में विदेश विशेष रिपोर्ट

अज़ैरबाइजान ने जंग नहीं की, अपना क्षेत्र छुड़वाया है

वसीम अकरम त्यागी

अज़ैरबाइजान ने यह माना है कि आर्मेनिया के साथ जंग में उसके 2783 सैनिक मारे गए। आर्मेनिया के भी कई सैनिकों की मौत हो गई। नागोर्नो काराबाख के शांति समझौते में अज़ैरबाइजान, आर्मेनिया और रूस ने दस्तख़त किए। आर्मेनिया की जंग और टेबल दोनों जगह हार हुई। आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान का यह बयान आर्मेनिया की हार समझने के लिए काफ़ी है, जब उन्होंने कहा “मेरे और मेरे देश के लिए यह (समझौता) बहुत पीड़ादायक है”। यह समझौता पूरी तरह से नागोर्नो काराबाख से आर्मेनिया की हार का दस्तावेज़ है। आर्मेनिया ने इस क्षेत्र से इस्लाम की हर निशानी मिटाने की कोशिश की। आम अज़ैरी मुसलमानों को उनके घरों से निकालकर पनाह लेने पर मजबूर किया, नौजवानों और बच्चों को जेल भेजा, आम लोगों के कत्ल किए, मस्जिदों को सूअर के बाड़े में बदला और दरगाहों को खोद या जला डाला। इन 30 सालों में दूसरी पीढ़ी जवान हो गई लेकिन आर्मेनिया के अत्याचार की कहानी अंतहीन रही। अज़ैरबाइजानी राष्ट्रपति इलहाम अलीयेव ने जीत का सहरा आम अज़ैरी जनता के सर बांधा।

छह सप्ताह तक चली जंग के बाद यह समझौता हुआ लेकिन आर्मेनिया की हार थमी नहीं है। सन् 1990 में जब सोवियत संघ टूट रहा था तब भी आर्मेनिया के जुल्म नागोर्नो काराबाख पर जारी थे। तब भी जंग रोकने के लिए समझौता हुआ था लेकिन उसे हम शांति समझौता नहीं कह सकते। साल 2020 की नागोर्नो काराबाख जंग में आर्मेनिया के जुल्म की कहानी अंतहीन है। सच्चाई के दर्पण से देखेंगे तो यह पता चलेगा कि ना आर्मेनिया हारा है और अज़ैरबाइजान जीता है। यह अज़ैरबाइजान के संयुक्त राष्ट्र से मान्यता प्राप्त क्षेत्र वापस मिलने की घोषणा मात्र है।

विदेशी आतंकवादियों के भरोसे आर्मेनिया

मीडिया रिपोर्टों से पता चला है कि अर्मेनियाई सेना विदेशी भाड़े के सैनिकों का उपयोग काराबाख में अज़ैरबाइजान के खिलाफ लड़ने के लिए कर रहे हैं। विशेष रूप से, अर्मेनिया सीरिया और इराक के आतंकवादियों को कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) से स्थानांतरित कर रहा है, जिसे अमेरिका और यूरोपीय संघ सहित सभी पश्चिमी देशों द्वारा आतंकवादी माना गया है। अज़ैरबाइजान के नागोर्नो काराबाख क्षेत्र में आर्मेनिया ने भाड़े के आतंकवादियों को प्रशिक्षण भी दिया है जबकि संयुक्त राष्ट्र के 1949 के जिनेवा सम्मेलन के मुताबिक़ विदेशी किसी भी देश की तरफ से जंग में भागीदार नहीं हो सकते।

अक्टूबर की शुरुआत में, अज़ैरबाइजान की राज्य सुरक्षा सेवा ने संघर्ष क्षेत्र में अज़ैरबाइजान के खिलाफ आर्मेनिया की ओर से लड़ रहे कुर्द आतंकवादियों के रेडियो संचार को रोक दिया। एक वीडियो में वार्तालापों की ऑडियो रिकॉर्डिंग और उनके टेप यूट्यूब पर पोस्ट किए गए हैं। इस बातचीत के अनुसार, आतंकवादी आर्मेनिया के पक्ष में अनिश्चित स्थिति और कई नुकसानों पर चर्चा करते हैं। वे इस बारे में भी बात करते हैं कि अज़ैरबाइजानी पक्ष ड्रोन का प्रभावी ढंग से उपयोग कैसे करते हैं और अफसोस जताते हैं कि युद्ध क्षेत्र में अर्मेनियाई लोगों ने उन्हें धोखा दिया है।”

 

खुफिया सूत्रों ने यह भी बताया कि आर्मेनिया ने पीकेके आतंकवादियों को अज़ैरबाइजानी सेना के खिलाफ लड़ने के लिए शुशा में तैनात किया। पकड़े गए आर्मेनियाई सैनिक मिकायाली अल्बर्ट यारवंडी ने बताया कि आर्मेनिया ने 1500 पीकेके जंगजू 600 डॉलर के भाड़े पर उठाए हैं जो उनकी तरफ से लड़ रहे हैं।“

हाल ही में एक साक्षात्कार में, अज़ैरबाइजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने जोर देकर कहा कि आर्मेनिया ने विदेशी भाड़े के सैनिकों और सक्रिय रूप से फोटो और वीडियो दस्तावेजों के साथ-साथ विदेशी नागरिकों के पासपोर्ट भी मिले हैं।, फ्रांस, अमेरिका, लेबनान, कनाडा, जॉर्जिया आदि देशों से भाड़े के लोग आर्मेनिया की तरफ़ से जंग करने के लिए नागोर्नो काराबाख में पहुंचे। “इनमें से कुछ नागरिक अर्मेनियाई मूल के हैं, कुछ नहीं हैं। लेकिन यह इस मुद्दे का सार नहीं बदलता है, क्योंकि आर्मेनिया की ओर से विदेशी जंगजू की भागीदारी, ज़ाहिर लेकिन नामंजूर है।”

यह कोई रहस्य नहीं है कि आर्मेनिया के आह्वान से प्रेरित विभिन्न देशों के नागरिकों ने काराबाख में अज़ैरबाइजान के खिलाफ लड़ने के लिए आर्मेनिया की यात्रा की है। काराबाख में सशस्त्र बलों में शामिल होने का एक मुख्य कारण अर्मेनियाई लोगों के लिए उनकी ईसाई एकजुटता का प्रदर्शन करना था।

जैसा कि रेडियो फ्रांस इंटरनेशनेल ने कहा, सीरिया, लेबनान और लैटिन अमेरिका से लगभग 30 विदेशी लड़ाके पहुंचे। रूस में यह आरोप लगाया गया था कि अर्मेनियाई संघ ने 20,000 स्वयंसेवकों को सूचीबद्ध किया जो आर्मेनिया के लिए लड़ने के लिए तैयार थे। इसके अलावा, आर्मेनिया के यज़ीदी समुदाय,  जिसकी संख्या भी कम है, उन्होंने नागोर्नो-काराबाख में लड़ने के लिए स्वयंसेवकों की एक इकाई स्थापित की, जिनमें से कई युद्ध में घायल हो गए हैं।

आर्मेनिया के प्रवासियों ने खुलकर अपने देश के ग़ैर कानूनी कॉल में मदद की। वित्तीय सहायता प्रदान करने के अलावा कई अर्मेनियाई प्रवासियों ने 28 सितंबर को अर्मेनिया गणराज्य की सेना में “स्वैच्छिक भर्ती के लिए कॉल” के जवाब में अर्मेनियाई पक्ष पर लड़ने के लिए तत्परता व्यक्त की है।

वोरा वर्तनोव नाम के एक आर्मेनियाई ने आर्मेनिया की राजधानी येरेवान से “ विशेष सैन्य-देशभक्त सार्वजनिक संगठन” यानी VoMA संगठन शुरू किया, जिसका मूल वाक्य है “जीवित रहने की कला”।इस आदमी ने त्वरित सैन्य प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में भाग लेने के लिए लोगों से अपील की। आर्मेनिया के रक्षा मंत्रालय की कमान के तहत एक पर्वतीय राइफल बटालियन की स्थापना का लक्ष्य VoMA का लक्ष्य है।

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