इंसानियत की मिसाल

ईमानदारी की मिसाल बनीं आयशा, लौटाया लाखों की नक़दी और ज्वैलरी से भरा बैग

वसीम अकरम त्यागी

10 दिसंबर के रोज़ लखनऊ में रहने वाली वंदना मिश्रा के परिवार में शादी थी, वे अपने घर से शादी में जाने के लिये रवाना हुईं। लेकिन इस दौरान उनका एक बैग़ जिसमें तक़रीबन दो लाख रुपये और कुछ ज्वैलरी थी वह कहीं पर गिर गया। वंदना शादी के मंडप पहुंचीं तो उन्होंने पाया कि उनका वह बैग जिसमें नक़दी और ज्वैलरी थी वह कहीं गुम हो गया है, उन्हें झटका लगा। इसी बीच उनके पास फोन आया कि उनका बैग मिल गया है और वे उसे आकर ले जाएं, फोन करने वाले युवा ने अपना नाम सालिम बताया और एड्रेस बताया कि यहां से आकर अपना बैग ले लीजिये।

वंदना शादी मंडप से वापस उस एड्रेस पर पहुंचीं, वह एड्रेस उसी अपार्टमेंट में रहने वाले इंस्पेक्टर इरशाद त्यागी के फ्लैट का था। मुजफ्फरनगर के चरथावल के रहने वाले इरशाद त्यागी उत्तर प्रदेश पुलिस में इंस्पेक्टर हैं, फिलहाल वे हरदोई के बेनीगंज पुलिस स्टेशन में तैनात हैं। वंदना आनन फानन में उनके घर पर पहुंची, तो पता चला कि उनका बैग अपार्टमेंट में ही गिर गया था, जो किसी काम से बाहर निकलीं इरशाद त्यागी की पत्नी आयशा त्यागी ने उठा लिया। वे उस बैग को उठाकर अपने घर ले आईं, जब उसे खोला तो उसमें नक़दी और ज्वैलरी थी, फिर उन्होंने उस बैग मे रखे काग़जों को देखा जिसमें एक कार्ड पर मोबाईल नंबर लिखा हुआ था, उन्होंने उस नंबर पर कॉल करके कहा कि आपका बैग जिसमें नक़दी और ज्वैलरी थी वह हमें मिला है, इसे आकर ले जाईए।

ईमानदारी की मिसाल

मूलरूप से मुजफ्फरनगर की रहने वाली आयशा त्यागी बीते 11 वर्षों से परिवार समेत लखनऊ में रहतीं हैं। इस संवाददाता से बात करते हुए उन्होंने बताया कि मैं किसी काम से बाहर जाने के लिये घर से बार निकली तो रास्ते में मुझे ये बैग मिला, मैं उसे लेकर घर लौट आई, मैंने बैग खोला उसमें नक़दी और ज़ेवरात थे उसी में एक कार्ड भी था मैंने उस पर लिखे मोबाईल नंबर पर कॉल किया और उनसे कहा कि आपका बैग मुझे मिला है आप इसे आकर ले जाईए। आयशा बताती हैं कि किसी की अमानत में खयानत करना बहुत बड़ा गुनाह है, एक मुसलमान को यह शोभा नहीं देता कि वह किसी की अमानत में खयानत करे। उन्होंने कहा कि बैग लौटाकर उन्हें दिली सुकून मिला है।

आयशा त्यागी

दरियादिली की मिसाल हैं आयशा

आयशा त्यागी की छोटी बहन खुशनुमा परवीन बचपन से ही अपनी बड़ी बहन के साथ रहीं हैं। खुशनुमा बताती हैं कि आयशा बाजी (बड़ी बहन) दरियादिली की मिसाल हैं, उन्होंने बचपन से ही मेरी परवरिश की, अम्मी के इंतक़ाल के बाद अपनी औलाद की तरह मेरी परवरिश की, यहां तक मेरी शादी भी आयशा बाजी ने ही कराई है। खुशनुमा बताती हैं कि आयशा दस साल वर्षों तक चरथावल नगरपंचायत में सभासद भी रही हैं। उनकी मिलनसारी, और दरियादिली का ही नतीजा है कि आज भी जब वे कभी चरथावल आती हैं तो पूरा मौहल्ले का जमावड़ा उनके घर पर लग जाता है, वे सबकी मदद करती हैं, सबसे मिलती हैं। खुशनुमा बताती हैं कि चरथावल में उनके आस पड़ोस में जब भी कोई शादी ब्याह होता है, और उसमें दूर होने के कारण बाजी शिरकत नहीं कर पातीं तो लखनऊ से ही कन्यादान तक भिजवा देतीं हैं। खुशनुमा के मुताबिक़ उनकी बहन ने एक मां की तरह उनकी परवरिश की, पढ़ाया लिखाया और फिर शादी की, शादी के बाद भी जो रस्में होतीं हैं उन्हें भी आयशा बाजी ने खुशी खुशी अदा किया है।

खुशनुमा परवीन (आयशा त्यागी की छोटी बहन)

तब इंस्पेक्टर इशाद त्यागी ने लौटाया था नक़दी और ज्वैलरी से भरा बैग

यह महज़ इत्तेफाक़ ही है कि आयशा त्यागी ने जिस तरह अपनी ईमानदारी का सबूत दिया है, इससे पहले यही कारनामा उनके पति इरशाद त्यागी भी कर चुका हैं। 23 मार्च 2013 में इरशाद त्यागी लखनऊ की एनईआर चौकी के प्रभारी हुआ करते थे। लखनऊ के ही गोमतीनगर के विनीत खंड निवासी रमेशचंद की पत्नी भाग्यलक्ष्मी एनईआर सुर्कुलेटिंग क्षेत्र में ऑटो के पास अपना बैग भूल आईं थीं। उस बैग को तत्कालीन चौकी प्रभारी मोहम्मद इरशाद त्यागी ने उसे अपने कब्जे में ले लिया। जब इंस्पेक्टर इरशाद त्यागी ने बैग को खोला तो देखा कि उस बैग में लाखों के जेवरात और कुछ नक़दी भी, लेकिन इतनती बड़ी रक़म देखकर भी इरशाद त्यागी का ईमान नहीं डगमगाया, उन्होंने बैग में रखी एक दवाई की पर्ची पर लिखे मोबाईल नंबर पर कॉल किया और बताया कि बैग उनके पास अमानत के तौर पर महफूज़ है। इसके बाद भाग्यलक्ष्मी अपने परिवार के सदस्यों के साथ एनईआर चौकी पहुंची, और इरशाद त्यागी को दुआओं से नवाज़ा। भाग्यलक्ष्मी ने चौकी प्रभारी इरशाद त्यागी को इनाम स्वरूप जेवरात देने की कोशिश की लेकिन इरशाद त्यागी ने इनकार कर दिया।

24 मार्च 2013 को अमर उजाला में प्रकाशित

उस रोज़ दिखे तो खाकी के दो रंग

यह भी इत्तेफाक़ ही है कि जिस रोज़ इरशाद त्यागी का ईमान लाखों के जेवर सामने पाकर भी नहीं डगमगाया था उसी रोज़ लखनऊ में ही एक इंस्पेक्टर मात्र दस हज़ार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में सस्पेंड हुआ था। अगले दिन लखनऊ के अखबारों में एक खबर प्रकाशित हुई जिसका शीर्षक था ‘राजधानी में दिखे पुलिस के दो चेहरे’ इस खबर में एक तरफ सब इंस्पेक्टर इरशाद त्यागी की तस्वीर थी जिसमें उनकी ईमानदारी का किस्सा था, तो दूसरी उस दरोगा का ज़िक्र था जिसे दस हज़ार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

Donate to TheReports!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.Code by SyncSaS