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दिल्ली कांग्रेस की मांग आक्सीजन की कमी से हुई मौतों की सही जानकारी दे सरकार, और उन परिवारों 5 लाख रूपए मुआवजा दे।

नई दिल्ली: दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चौ. अनिल कुमार ने राज्य सभा में मोदी सरकार द्वारा दिल्ली सरकार से प्राप्त सूचना अनुसार आक्सीजन की कमी से एक भी मौत नहीं होने की बात सूचना दिए जाने पर अपना आक्रोष दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन में संवाददाताओं को सम्बोधित करते हुऐ जताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता ने आक्सीजन के लिए दर-दर भटकते देखा है। आक्सीजन की कमी से कई मौतें अस्पतालों के बाहर ऑटो, एम्बुलेंस तथा बीच सड़कों पर हुई। चौ. अनिल कुमार ने दिल्ली सरकार से मांग की है कि दिल्ली में हुई आक्सीजन की कमी से मौतों की सही जानकारी दे और उन सभी परिवारों को कम से कम 5 लाख रूपए अर्थिक सहायता के रूप में मुआवजा दे।

चौ. अनिल कुमार ने कहा कि दूसरी लहर के दोरान सेकड़ों मौतें आक्सीजन की कमी से हुई है। केजरीवाल सरकार ने जयपुर गोल्डन अस्पताल मामलें में दिल्ली हाई कोर्ट में अपनी ही सरकार द्वारा गठित एक समिती की रिपोर्ट पेश कर आक्सीजन से हुई मौतों को नकारा था। अब राज्य सभा में पूछे गए सवाल के जबाव में उन्होंने पूरी दिल्ली में एक भी मौत आक्सीजन से नहीं होने की बात कही है।

चौ. अनिल कुमार ने कहा कि एक तरफ मंत्री व मुख्यमंत्री आक्सीजन की कमी से हुइ मौत की बात मिडिया में स्वीकार करते है तो दूसरी तरफ कोर्ट व राज्य सभा में अलग ही सूचना पेश कर रहे है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल व भाजपा के द्वारा इस खेल का असली मंशा आक्सीजन की कमी से हुई मौत के आरोप से मोदी केजरीवाल को बचाना तथा पीड़ित परिवारों को मुआवजे की राशि से वंचित करना चाहते है।

चौ. अनिल कुमार ने कहा कि कुछ दिनों पहले भाजपा व केजरीवाल सरकार ने आक्सीजन की कमी से हुई मौत की पहचान व मुअवजा देने वाली समीति को मिलकर निरस्त किया था। दिल्ली कांग्रेस आक्सीजन की कमी से हुई मौतों के दावे की सही पहचान करने के लिए रिटार्यड हाई कोर्ट के जज की निगरानी में समीति बनाने की मांग कर रहे थे, समीति को बनाना तो दूर बनी हुई समीति को भी निरस्त कर दिया गया। लेकिन हरानी की बात यह है कि अब सरकार आक्सीजन की कमी से हुई मौतों को भी नकार रही है।

चौ. अनिल कुमार ने कहा कि दूसरी लहर के दोरान प्रयाप्त आक्सीजन की उपलब्धता होने के बावजूद भण्डारण व टैंकरों की कमी के कारण सैकड़ों जाने गई । केजरीवाल सरकार ने 976 मिट्रीक टन आक्सीजन की आवश्यकता बता कर अपनी नैतिक जिम्मेदारी से भी पल्ला झाड़ लिया। दिल्ली में जब अस्पतालों से आपात जरूरत की सूचनाऐं प्राप्त होने लगी तब जाकर सरकार हरकत में आई। उन्होंने कहा कि अरविन्द केजरीवाल पर इस आपराधिक लापरवाही के लिए हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।