जनता को रौंदकर मार देने वाले अमृत महोत्सव मना रहे हैं, और हम सब हर दिन वहशीपन का नया रूप देखने के लिए अभिशप्त हैं!

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जनता को रौंदकर मार देने वाले अमृत महोत्सव मना रहे हैं. उनके नारे में अमृत और उत्सव है, लेकिन कृत्य में जहर और क्रूरता है. मारने वाला कोई साधारण आदमी नहीं है. वह केंद्रीय मंत्री का बेटा है. मंत्री का जहरबुझा भाषण वायरल है. किसानों को रौंदते हुए मंत्री के बेटे का वीडियो वायरल है. सच नंगा होकर दुनिया के सामने है. पूरे देश की जनता असहाय होकर ये तमाशा देख रही है.

जहां ये महोत्सव हो रहा है, उससे करीब सौ किलोमीटर दूर उन चार किसानों की लाशें अभी न्याय का इं​तजार कर रही हैं जिन्हें मंत्री के मदांध बेटे ने गाड़ी से रौंद कर मार दिया. अभी तक उनके अंतिम संस्कार नहीं किए गए हैं.

ये किसी फिल्म का कोई खौफनाक दृश्य नहीं है. यह आज के भारत की सच्चाई है. सत्ता में बैठे लोग किसी को भी कुचल कर मार देंगे, जनता की जिंदगी जहन्नुम बना देंगे, इधर लाशें पड़ी होंगी, उधर वे उत्सव मनाएंगे.

कोई कार्रवाई नहीं. कोई अफसोस नहीं. कोई गिरफ्तारी नहीं. हत्यारा अपने गिरोह का हो तो उसके हजार खून माफ हैं.

मारे गए चारों किसानों के शव अभी रखे हैं. परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है. चारों किसानों के परिवार वालों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए हैं और अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है. परिजनों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट गलत बनाई गई. हमें शक हैं इन्हें गोली भी गारी गई.

कहा जा रहा है कि चारों में से एक मृतक गुरविंदर को गोली लगी है. किसानों की मांग है कि पांच डॉक्टर्स की टीम से पोस्टमार्टम कराया जाए. परिवार का कहना है कि शरीर पर गोली के निशान हैं.

बहराइच के नानपारा के रहने वाले दलजीत सिंह के परिवार वालों को शक है की उन्हें भी गोली मारी गई.

चारों किसानों के शव रखे हैं. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में एक मंत्री के बेटे ने इन्हें कुचल कर मारा है. उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है. न कार्रवाई होने की कोई मंशा दिख रही है. विपक्षी नेता जरूर नजरबंद हैं या गिरफ्तार हैं.

किसानों की राख अभी ठंडी तक नहीं हुई हैं और देश के प्रधानमंत्री उन लाशों से करीब सौ किलोमीटर दूर उत्सव मना रहे हैं. इस नरसंहार के बाद सरकारी कुनबे ने सिर्फ एक काम ढंग से किया है और वह है झूठ फैलाना. झूठ और प्रोपेगैंडा फैलाने में कोई कमी नहीं रखी गई है.

हम सब हर दिन नफरत, हिंसा, क्रूरता और वहशीपन का नया रूप देखने के लिए अभिशप्त हैं.

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