माल जनता का मज़े लूटे अडाणी! केंद्र ने 1300 करोड़ की एयरपोर्ट अथॉरिटी की संपत्तियां अडाणी को 500 करोड़ में बेचीं

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देश के छह बड़े एयरपोर्ट 50 सालों के लिए अदाणी को सौपे जा चुके हैं, और 25 अन्य हवाईअड्डों को भी उसी को सौपने की तैयारी की जा रही है, सबसे दिलचस्प बात यह है कि इन सारे एयरपोर्ट को अडानी के हवाले करने से पहले सरकार इनका ढांचा दुरुस्त करने के नाम पर 14,500 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, देश भर में लगभग 100 से अधिक एयरपोर्ट है इन पर कुल 25 हजार करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई गई थी लेकिन मोदी सरकार इसमें से आधी से ज्यादा रकम उन्हीं हवाईअड्डों पर खर्च करती रही है जिन्हें या तो अडानी को सौंपे जा चुका हैं या भविष्य में उसे ही देने की तैयारी है।

गुवाहाटी हवाईअड्डे पर 1,000 करोड़ रुपये की लागत से एयरपोर्ट टर्मिनल की नई इमारत का निर्माण किया गया है, इंदौर में तो पूरी तरह से नया एयरपोर्ट निर्माण किया गया है तिरुवनंतपुरम एवं गुवाहाटी की हवाईपट्टियों के विस्तार में 100 करोड़ रुपये लगाए गए हैं, इस प्रकार 2017 से 2020 के दौरान 2,500 करोड़ रुपये से अधिक राशि खर्च की गयी है

अक्टूबर की शुरुआत में एयरपोर्ट अथॉरिटी के कर्मचारी संघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सूचित किया कि मेंगलुरु, लखनऊ और अहमदाबाद एयरपोर्ट पर मौजूद एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया  की 1300 करोड़ रुपये की एयरोनॉटिकल और नॉन-एयरोनॉटिकल संपत्तियों को अडाणी इंटरप्राइजेज लिमिटेड को मात्र 500 करोड़ रुपये में बेच दिया गया जबकि निजीकरण के लिए सरकार के पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप अप्रेजल कमिटी (पीपीपीएसी) से मंजूरी मांगे जाने के दौरान खुद नागरिक विमानन मंत्रालय ने इन संपत्तियों की कीमत 1300 करोड़ रुपये आंकी थी.

बिजनेस स्टैण्डर्ड अखबार में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक़ प्राधिकरण के कर्मचारी संगठन ने जून में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में लिख दिया था कि इन हवाईअड्डों के रखरखाव का जिम्मा अदाणी समूह को सौंपे जाते समय जारी निर्माण कार्यों का भुगतान निजी कंपनी को करना चाहिए, अनुबंध में इसका उल्लेख है कि निर्माणाधीन कार्यों पर आए खर्च को वहन करने के लिए अदाणी उत्तरदायी है। इस लेख में यह भी कहा गया है कि अदाणी ने तीन हवाईअड्डों को सौंपे जाने के बाद 2,000 करोड़ रुपये भी जमा नहीं किए हैं, अगर फौरन इस राशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो फिर जमानत जब्त करने के साथ करार भी रद्द करने के सख्त कदम उठाने चाहिए।

लेकिन ऐसे लेटर्स पर कौन ध्यान देता है? जब सालो तक अडानी के प्लेन में गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी दौरे करते रहे हो तो इतना हक तो अडानी का बनता ही है कि देश पर मोदी राज के सात सालों में उस एहसान की पूरी कीमत वसूल ले।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं)