विदेश विशेष रिपोर्ट

अमेरिका के ओक्लाहोमा में हुए अश्वेत समुदाय के जनसंहार के 100 वर्ष मुकम्मल, नहीं मिल सका न्याय

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन अमेरिका के अश्वेत समुदाय के नरसंहार की 100वीं बरसी के मौके पर ओक्लाहोमा के तुलसा में एक समारोह में शामिल हुए। 1921 में इस शहर में हुए नस्लवादी हमलों ने अश्वेत समुदाय के 300 लोगों की जान ली थी। इस हिंसा में दस हज़ार अश्वेत लोग विस्थापित हुए थे।

सौ साल पहले क्या हुआ था?

31 मई, 1921 को अमेरिका के तुलसा में हुई नस्लीय हिंसा को अमेरिका में होने वाली शर्मनाक घटनाओं में  सबसे शर्मनाक माना जाता है। सौ साल पहले, 31 मई को नरसंहार शुरू हुआ था, जब एक 19 वर्षीय अश्वेत व्यक्ति पर 17 वर्षीय श्वेत लड़की से छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया था। आरोपों के बाद, श्वेत नस्लवादी भीड़ ने तुलसा के ग्रीनवुड क्षेत्र को निशाना बनाया, इस इलाक़ें में अश्वेतों की आबादी ज्यादा थी। यह इलाक़ा अपनी आर्थिक स्थिरता के कारण “ब्लैक वॉल स्ट्रीट” के रूप में जाना जाता था। इन हमलों में तुलसा पुलिस न केवल श्वेत हिंसक भीड़ में शामिल हुई, बल्कि श्वेत पुलिस अधिकारियों ने हमलावरों को हथियार भी उपलब्ध कराए। तत्काली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्दीधारी श्वेत पुलिस अधिकारी भी ग्रीनवुड क्षेत्र में आगजनी के हमलों और अश्वेतों की गोलीबारी में शामिल थे।

1921 में हुई इस घटना को आम तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका में आने वाले वर्षों में नजरअंदाज कर दिया गया था। लेकिन 2013 में, तत्कालीन तुलसा पुलिस प्रमुख चक जॉर्डन ने औपचारिक रूप से ग्रीनवुड में अपने विभाग की इस भूमिका के लिए माफी मांगी,जिसके बाद यह घटना नए सिरे से जांच के दायरे में आई। जॉर्डन ने माफी मांगते हुए स्वीकार किया कि पुलिस ने 1921 के नरसंहार के दौरान नागरिकों की रक्षा नहीं की थी।

ब्लैक वॉल स्ट्रीट

अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में स्थित वॉल स्ट्रीट अपने स्टॉक एक्सचेंजों और निवेशक बैंकों के कारण दुनिया भर में आर्थिक गतिविधियों का प्रतीक माना जाता है। तुलसा के ग्रीनवुड क्षेत्र को एक सदी पहले यहां हुई आर्थिक गतिविधि और विकास के कारण ‘ब्लैक वॉल स्ट्रीट’ के नाम से भी जाना जाता था। 19वीं शताब्दी के मध्य में संयुक्त राज्य अमेरिका में गृहयुद्ध से पहले और उसके दौरान दक्षिणी संयुक्त राज्य से भागे बहुत से अश्वेत परिवार तुलसा में बस गए। इन अश्वेत अमेरिकियों ने सरकारी संस्थानों और समाज में नस्लीय पूर्वाग्रहों के बावजूद आर्थिक विकास की यात्रा शुरू की। इसके बाद के वर्षों में, समुदाय में अश्वेत व्यवसायियों और कामकाजी परिवारों की संख्या में इज़ाफा होता चला गया। अश्वेतों का कारोबार फलफूल रहा था, यहां दुकानें, होटल, डॉक्टर और वकीलों के कार्यालय भी स्थापित किए गए।

ग्रीनवुड के अश्वेत समुदाय ने अपनी स्कूल प्रणाली, बचत और ऋण संस्थान, अस्पताल, साथ ही क्षेत्र में एक बस और टैक्सी सेवा भी संचालित की थी। उस समय संयुक्त राज्य अमेरिका में श्वेत जातिवाद पर आधारित ‘जिम क्रो लॉज़’ और ‘को-क्लिक्स क्लीन’ जैसे श्वेत जातिवादी समूहों की ताकत के बावजूद, ग्रीनवुड में अश्वेत समुदाय आर्थिक रूप से तरक्की कर रहा था।  जिसकी बदौलत उनके द्वारा की जाने वाली समान अधिकार मांग भी ज़ोर पकड़ रही थी। यही कारण है कि यहां का समुदाय गर्व का स्रोत बनता जा रहा है और संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके आसपास रहने वाले अश्वेतों के लिए एक उदाहरण बन रहा है। क्षेत्र के आर्थिक विकास के कारण, इसे श्वेत नस्लवादियों द्वारा भी निशाना बनाया गया था और दो दिनों के भीतर उन्होंने ब्लैक वॉल स्ट्रीट को नष्ट कर दिया था जिसे बनने में एक दशक से अधिक समय लगा था।

कुछ ही घंटों में सब खत्म हो हो गया

107 वर्षीय वियोला फ्लेचर, जो हमलों से बच गए, हाल ही में वाशिंगटन डीसी में एक कांग्रेस समिति के सामने पेश हुए। उन्होंने समिति को हमले में अपने नुकसान के लिए मुआवजे का मुद्दा उठाया और समिति को उस समय की अपनी यादों से भी अवगत कराया, उस वक्त वे सिर्फ सात साल के थे। उन्होंने बताया कि 31 मई, 1921 को, मैं अपने घर में सोने की तैयार कर रहा था, मेरा पारिवारिक घर सुंदर था। हमारे पड़ोसी बहुत अच्छे थे। मेरे दोस्त भी थे जिनके साथ मैं खेला करता था। कुछ ही घंटों में सब कुछ खत्म हो गया। उन्होंने बताया कि नरसंहार की रात उनके परिवार ने उन्हें जगाया। मेरे माता-पिता और पांच भाई-बहन भी थे। मुझे बताया गया कि हमें घर छोड़कर भागना होगा, मैं श्वेतों की उस विनाशकारी भीड़ को कभी नहीं भूलूंगा जिसे मैंने देखा था।

अपने बयान में उन्होंने कहा, “मैं अभी भी देख सकता हूं कि कैसे अश्वेतों को गोली मारी गई थी। कैसे उनके  शव सड़कों पर बिखरे हुए थे। मैं अभी भी धुएं को सूंघ सकता हूं और वहां “मैं धधकती आग को देख सकता हूं। अश्वेतों के व्यवसायों को आग लगा दी गई। मैं अभी भी हवा में उड़ने वाले विमानों की आवाज सुन सकता हूं। मैं अभी भी उन चीखों को सुन सकता हूं।”

अतीत से वर्तमान तक

अधिकांश अमेरिकी तुलसा में हुई हिंसा से अनजान हैं। हालांकि, संयुक्त राज्य अमेरिका में, पुलिस को अभी भी नस्लीय भेदभाव और अल्पसंख्यकों के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, संयुक्त राज्य अमेरिका नस्ल के आधार पर नए आर्थिक भेदभाव और मतदान कानूनों पर चर्चा कर रहा है, जिस पर आलोचकों का कहना है कि यह अश्वेत और हिस्पैनिक मतदाताओं के मतदान और प्रभाव को प्रभावित करेगा। तुलसा में 1921 की घटनाओं में से केवल तीन चश्मदीद जिंदा बचे हैं, जो 100 वर्ष से अधिक हैं। 1960 में संयुक्त राज्य अमेरिका में हिंसक नागरिक अधिकार आंदोलन से चार दशक पहले यहां नस्लवादी हमले हुए, जिसने आखिरकार अश्वेत अमेरिकियों को वोट देने का अधिकार मिला और समाज में समान अधिकारों की उनकी मांगों को मान्यता मिली। संयुक्त राज्य अमेरिका के दक्षिण-पश्चिम में तुलसा शहर की आबादी अब चार मिलियन है। इस हिंसा के 100 वर्ष पूरे होने पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यहां एक संग्रहालय का भी उद्घाटन किया है। इस संग्राहलय में 1921 की घटनाओं का इतिहास है। लेकिन इस सवाल का जवाब मिलना बाकी है कि इन हमलों के पीड़ितों और पीड़ितों के वारिसों को मुआवजा कब दिया जाएगा और उन्हें कितना मुआवज़ा दिया जाएगा।  इसी तरह, नरसंहार में मारे गए लोगों की कब्रें कैसे मिलेंगी? फ्लेचर और उनके 100 वर्षीय भाई वैन एलिस और 106 वर्षीय लेसी बेनिंगफील्ड रान्डेल तुलसा सिटी, तुलसा काउंटी, ओक्लाहोमा स्टेट और तुलसा चैंबर ऑफ कॉमर्स के खिलाफ दायर मुकदमों में मुख्य वादी हैं। उनका मानना ​​है कि नरसंहार के लिए उनके लोग जिम्मेदार हैं।

होने लगा विवाद

1921 में होने वाली इस हिंसा की 100वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में 2021 में कई विवाद पैदा हो गए हैं। घटनाओं की जांच के लिए बनाया गया आयोग, तुलसा रेस मेसियर सेंटिनल कमीशन ने “अप्रत्याशित परिस्थितियों” के कारण घटना को मनाने के लिए “स्मरण और उदय” म्यूज़िक शो रद्द कर दिया है। यह शो अश्वेत गायक जॉन लीजेंड को करना था और इसे वोटिंग अधिकार डेमोक्रेट स्टेसी अब्राम्स को संबोधित किया गया था। ओक्लाहोमा के गवर्नर केविन स्टट को घटना की जांच के लिए गठित 100 साल के आयोग से पहले ही हटा दिया गया है। उन्होंने पब्लिक स्कूल के शिक्षकों को “क्रिटिकल रेस थ्योरी” पढ़ाने से रोकने वाले कानून पर हस्ताक्षर किए। बौद्धिक आंदोलन के बाद उभरे ‘क्रिटिकल रेस थ्योरी’ के अनुसार मानव समाज में नस्लीय भेदभाव या अलगाव का आधार प्राकृतिक नहीं है, न ही यह रंग या शारीरिक पहचान पर आधारित था। इस सिद्धांत के अनुसार, रंग के आधार पर अन्य वर्गों से संबंधित लोगों को दबाने के लिए सामाजिक स्तर पर नस्लीय अलगाव “आविष्कार” किया गया था, जबकि वास्तव में यह अस्तित्व में नहीं था।

मुआवजा मामला

तुलसा रेस मेसियर सेंटिनल कमीशन की भी हमलों के पीड़ितों और पीड़ितों की दुर्दशा को दूर करने में विफल रहने के लिए आलोचना हुई है। शहर में नरसंहार में मारे गए लोगों को दफनाने के संदेह वाले स्थलों की खुदाई भी शुरू कर दी है। ओक्लाहोमा राज्य सीनेटर और नरसंहार पर शताब्दी आयोग के प्रमुख, केविन मैथ्यूज ने पिछले हफ्ते संवाददाताओं से कहा था कि इस हिंसा में जीवित बचे लोगों को शुरू में मुआवजे के रूप में एक लाख डॉलर और जान गंवाने वालों को 20 लाख डॉलर देने की सिफारिश की थी, जिसे आयोग ने स्वीकार कर लिया था। लेकिन उन्होंने कहा कि हिंसा के पीड़ितों ने इसके बाद जीवित बचे लोगों के लिए दस लाख डॉलर और जान गंवाने लोगों के लिये 50 लाख डॉलर प्रति मृतक के परिजनों को दिये जाने की मांग की, जिसे स्वीकार नहीं किया गया। वहीं पीड़ितों के वकील ने कहा कि यह मांग ऐसी नहीं है जिस पर बातचीत न हो सके. लेकिन हमलों में जिंदा बचे लोगों और पीड़ितों के वारिसों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता के साथ, कोई सवाल ही नहीं है कि पीड़ितों की राहत के लिए स्थापित धन का प्रबंधन दक्षिण तुलसा समुदाय द्वारा किया जाना चाहिए और एक ब्लैक बैंक में रखा जाना चाहिए।