वो मुस्लिम पहलवान जिन्हें 50 साल तक कोई नहीं हरा पाया, रुस्तम-ए-हिंद के नाम से थे प्रसिद्ध

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‘गामा पहलवान’..एक ऐसा भारतीय पहलवान, जिसने एक भी कुश्ती नहीं हारी। दुनिया में भारत का नाम रोशन किया और यही सम्मान है कि आज उनके 144 जन्मदिन पर  गूगल ने डूडल बनाकर सेलिब्रेट कर रहा है। वैसे तो देश में एक से बढ़कर एक पहलवान हुए लेकिन द ग्रेट गामा और रुस्तम-ए-हिंद से जाने पहचाने वाले गामा का अलग ही दबदबा था। जिसने भी उनके खिलाफ दांव लगाने की कोशिश की, चारों खाने चित हो गया। कोई भी इस पहलवान के सामने टिक नहीं पाता था। गामा पहलवान (Gama Pehalwan) ने अपनी लाइफ में 50 साल तक कुश्ती लड़ा। एक से बढ़कर एक किताब अपने नाम किया और खूब नाम भी कमाया। उनकी लाइफ और अचीवमेंट्स को जानिए..

गामा पहलवान का जन्म 22 मई 2022 को पंजाब (Punjab) के अमृतसर (Amritsar) के जब्बोवाल गांव में हुआ था। कई जगह यह भी कहा जाता है कि उनका जन्म मध्यप्रदेश के दतिया में हुआ था। वो एक कश्मीरी मुस्लिम परिवार से आते थे। गामा के पिता  मुहम्मद अजीज बक्श भी एक पहलवान थे। तब वे दतिया के महाराजा भवानी सिंह के दरबार में कुश्ती लड़ा करते थे। गामा पहलवान जब छह साल के हुए तो उनके सिर से पिता का साया उठ गया। पिता के जाने के बाद उनके नाना नून पहलवान और मामा ईदा पहलवान ने उन्हें दांव-पेंच की बारीकियां सिखाईं।

पहली बार गामा को लोगों ने तब जाना जब वे महज 10 साल  के थे। बातसाल 1888 की है। राजस्थान के जोधपुर में एक प्रतियोगिता हुई। जिसका मकसद था सबसे ताकतवर इंसान की खोज। इस प्रतियोगिता में 400 से ज्यादा पहलवान हिस्सा लेने पहुंचे। जब प्रतियोगिता समाप्त हुई तो गामा टॉप-15 पहलवानों में शामिल थे। इतनी कम उम्र में गामा की ताकत देख हर कोई हैरान रह गया। जोधपुर के महाराज ने उनकी कम उम्र को देखते हुए गामा को ही विजेता घोषित कर दिया। इसके बाद गामा भी दतिया महाराज के दरबार में पहलवानी करने लगे।

इसके बाद गामा के सामने बड़े से बड़ा पहलवान भी नहीं टिक पाता था। उनका नाम धीरे-धीरे बढ़ता गया। गामा पहलवान की हाईट सिर्फ 5 फीट 7 इंच थी और उनका वजन 113 किलो। उनकी हाईट की वजह से ही साल 1910 में लंदन में हुए इंटरनेशन कुश्ती चैंपियनशिप में उन्हें शामिल नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने वहां मौजूद पहलवानों को चुनौती दी कि वे किसी भी पहलवान को सिर्फ 30 मिनट में ही हरा सकते हैं। हालांकि उन्हें किसी ने सीरियस नहीं लिया और उनकी चुनौती को स्वीकार नहीं किया।

इसके बाद गामा ने विश्व चैंपियन स्टैनिस्लॉस जैविस्को, फ्रैंक गॉच को चुनौती दी और कहा कि या तो वह उन्हें हरा देंगे या इनाम में जो राशि मिलेगी वो उन्हें देकर वापस लौट जाएंगे। जिसके बाद अमेरिका के पहलवान बेंजामिन रोलर ने उनकी चुनौती स्वीकार की, जिन्हें गामा ने पहली बार में ही एक मिनट 40 सेकेंट में ही धूल चटा दिया। इसके बाद दूसरे को 9 मिनट 10 सेकेंड में चारों खाने चित  कर दिया। अगले दिन उन्होंने एक के बाद एक 12 पहलवानों को मात दी और रुस्तम-ए-हिंद के नाम से प्रसिद्ध हो गए।

अपने पांच दशक के कुश्ती के करियर में गामा ने कई खिताब अपने नाम किया। इसमें 1910 में वर्ल्ड हैवीवेट चैम्पियनशिप, 1927 में वर्ल्ड कुश्ती चैम्पियनशिप। कहा जाता है कि एक बार तो गामा ने मार्शल आर्ट आर्टिस्ट ब्रूस ली को भी चैलेंज कर दिया था। दोनों की मुलाकात भी हुई थी। तब ब्रूस ली ने गामा पहलवान से ‘द कैट स्ट्रेच’ सीखा। बताया जाता है कि जिस वक्त भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ, उन्होंने हिंसा में कई हिंदू परिवारों की जान बचाई। पाकिस्तान सरकार की अनदेखी के कारण उनकी लाइफ के आखिरी पल कापी तंगी में जूझे। 1960 में 82 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।

गामा पहलवान अपनी डाइट में देसी खानपान को रखते थे। उनके शरीर की मजबूती के हिसाब से उनकी डाइट भी हुआ करती थी। गामा पहलवान हर दिन 10 लीटर दूध पिया करते थे। उनकी डाइट में छह देसी मुर्गे शामिल थे। वे आधा लीटर घी, डेढ़ लीटर मक्खन, बादाम का शरबत और 100 रोटी खाया करते थे। गामा पहलवान हर दिन अपने 40 साथियों के साथ कुश्ती करते थे। अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में वे पांच हजार दंड-बैठक, तीन हजार पुश-अप करते थे। जिससे उनकी शरीर की बनावट भी काफी मजबूत थी।

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